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वेद प्रकाश काम्बोज
वेद प्रकाश काम्बोज जी का जन्म 1 दिसंबर 1939 को शाहदरा, दिल्ली में हुआ। बाबू राम स्कूल, शाहदरा, में पढ़ते हुए लालकिले में स्थित अपनी आर्टिफैक्ट्स की शॉप में पिता के साथ उनका हाथ बँटाने लगे। इसी दौरान इनको पढ़ने का शौक लगा। ये शौक इतना बढ़ा कि स्कूल की किताबें पीछे रह गई। पढ़ाई के बाद इन्होंने फुल टाइम शॉप पर जाना शुरु कर दिया।
इसी दौरान इन्होंने भारतीय लोक कथाओं के किस्से-कहानियाँ भी पढ़े। फिर ये धार्मिक किताबों से होते हुए जासूसी कथानकों तक पहुंचे। जनप्रिय लेखक श्री ओमप्रकाश शर्मा जी के माध्यम से इनका परिचय साहित्य संसार से हुआ। इन्होंने हिन्दी, उर्दू, बंगला और अँग्रेजी के प्रसिद्ध लेखकों की रचनाएँ भी पढ़ी।
इनकी पहली रचना ‘कँगूरा’ थी जोकि 1957-58 के आस-पास रंगमहल कार्यालय, खारी बावली दिल्ली से प्रकाशित हुई। इसके बाद नीलम जासूस कार्यालय और रतन एंड कंपनी, दिल्ली से इनके उपन्यास आते रहे। बाद में तो दिल्ली और मेरठ के अधिकतर प्रकाशनों से इनके उपन्यास आने लगे। नीलम जासूस कार्यालय के साथ इनका संबंध 60 साल पुराना है और अभी भी बरकरार है।
1962 में चीन और 1965 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्धों के बाद पाक-चीन की पृष्ठभूमि पर भी कई उपन्यास लिखे। इनकी लिखी सिंगही और अलफाँसे सीरीज बहुत ही ज्यादा लोकप्रिय हुई, इतनी कि इनके नाम से कई प्रकाशकों ने चोरी से इनके नाम से नकली उपन्यास बाजार में उतारे। किन्तु ऐसे सभी मुनाफाखोर प्रकाशकों को मुँह की खानी पड़ी।
सरल स्वभाव के वेद प्रकाश काम्बोज जी का नाम उन चंद लेखकों में शुमार होता है जिन्होंने बाबू देवकीनन्दन खत्री, श्री गोपालराम गहमरी की रहस्य-रोमांच और जासूसी विरासत को नए शिखरों पर पहुंचाया। अपने से वरिष्ठ लेखकों में विशेषकर श्री ओमप्रकाश शर्मा जी और श्री जवाहर चौधरी जी का नाम वे आज भी श्रद्धापूर्वक लेते हैं।
वैसे तो ये अपने रोमांचकारी कथानकों और तेज रफ्तार थ्रिलरों के जाने जाते हैं किंतु इन्होंने कुछ सामाजिक रचनाओं — पत्ती झरा गुलाब, कॉलेज का रोमांस, प्रतिष्ठा, नीड़ का पंछी और मेरा प्यार पुकारे — के साथ-साथ कुछ जासूसी कहानियां भी लिखी हैं। इन्होंने कई विश्वप्रसिद्ध रचनाओं के हिंदी अनुवाद भी किए जोकि पाठकों में बेहद लोकप्रिय भी हुए।
दोस्तों के दोस्त श्री कम्बोज जी की दोस्ती आधी सदी बीत जाने के बाद भी अपने पहले, दूसरे और तीसरे प्रकाशकों के साथ-साथ अन्य साथी लेखकों और प्रकाशकों के साथ आज भी कायम है।
400 से अधिक उपन्यासों के लेखक श्री वेद प्रकाश काम्बोज जी आजकल पौराणिक और ऐतिहासिक उपन्यास लेखन कर रहें हैं जिनमें युग पुरुष चाणक्य एवं चंद्रगुप्त, कपिलवस्तु का राजकुमार: बुद्ध कथा, सम्राट अशोक: राज्याभिषेक, जीवन स्मृति (टैगोर) और किस्से विद्वानों के प्रमुख हैं। अस्सी वर्षीय श्री काम्बोज जी की ऊर्जा और लेखन के प्रति उनके समर्पण को हम सलाम करते हैं।
ASIN : B0C5YDD5KR
Publisher : Neelam Jasoos Karyalay (21 May 2023)
Language : Hindi
File size : 610 KB
Text-to-Speech : Enabled
Screen Reader : Supported
Enhanced typesetting : Enabled
Word Wise : Not Enabled
Print length : 102 pages
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